बोधस्पर्शिका
**************
घोडा सरळ धावावा म्हणुनच
दोन्ही डोळ्यांबाजूने त्यांच्या झाकण
माणूस समाजात सरळ वागावा म्हणुन
त्याला संस्कारांची वेसण
अरुण
------------------------------------------
**************
घोडा सरळ धावावा म्हणुनच
दोन्ही डोळ्यांबाजूने त्यांच्या झाकण
माणूस समाजात सरळ वागावा म्हणुन
त्याला संस्कारांची वेसण
अरुण
------------------------------------------
No comments:
Post a Comment